*एस के श्रीवास्तव विकास*

*वाराणसी/-प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के निजी स्कूल का नया कारनामा ” आरटीई यानी राइट टू एजुकेशन ” के तहत गरीब जरुरत मंद बच्चों के दाखिले में घपलेबाजी का खेल जल्द होगी बड़ी खुलासा बच्चों का बयान खोलेगा स्कूलों के कार्यशैली का राज।प्राप्त जानकारी के मुताबिक आरटीई के तहत निजी स्कूलों में बच्चों का एडमिशन कराने के लिए अमीर भी गरीब बन रहे हैं।दो मंजिला मकान,कार से चलने वाले भी गरीबों के लिए चल रही योजना में सेंध लगाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर आवेदन कर रहे हैं।हालांकि जांच व सत्यापन में इनमें से ज्यादातर के आवेदन रिजेक्ट कर दिए जाते हैं।वहीं स्कूल संचालक भी कई बार सत्यापन कराते हैं।वहीं ज्यादातर मामले ऐसे हैं जो अमीर होने के बाद भी गरीबों के लिए चलाई जा रही योजना में आवेदन कर रहे हैं जांच व सत्यापन में इनके आवेदन निरस्त किए जाते है।विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बताते हैं कि आवेदन के बाद बीईओ (खण्ड शिक्षा अधिकारी) के माध्यम से सत्यापन कराया जाता है।सत्यापन में जो अपात्र मिलते हैं उनके आवेदन अस्वीकृत कर दिए जाते हैं।आरटीई के तहत गरीब परिवार के बच्चों का एडमिशन निजी स्कूलों में कराया जाता है।इन बच्चों की फीस सरकार स्कूलों को देती है।आरटीई के तहत बच्चों चयनित बच्चों के एडमिशन आदेश स्कूल को मिलने के बाद शहर से लगायत ग्रामीण क्षेत्र के कई स्कूल ऐसे हैं जो पात्रता का सत्यापन खुद कराते हैं।इसके पीछे वजह बताई जाता है कि अपात्र होने,दूसरे वार्ड गाँव में रहने वाले भी किसी प्रकार चयनित हो जाते हैं।इससे वास्तविक पात्र बच्चे छूट जाते हैं।स्कूल संचालक बताते हैं कि पूरी व्यवस्था पारदर्शी की जाए जिससे वास्तव में पात्र बच्चों का ही एडमिशन हो।हालांकि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि पात्रता की जांच के बाद ही आदेश जारी किया जाता है।*

